Wednesday, May 30, 2012

चाहूं हर पल के तेरी उम्मीद बनूँ
पर उस उम्मीद की लौ से खुद को कैसे महफूज़ करून
चाहूं हर पल के तेरे अंधेरों को रोशन करूं
पर उस उजाले में अपने सपने कैसे मैं अर्पण करूं

तेरे साथ चलूँ , तेरा साथ बनूँ
पर रास्ता अपना भी कैसे छोड़ दूं
तेरी आँखों के पालने में जो सपने पले
मेरी पलकों पर जो तारे सजे
अलग है उनके आसमान, अलग है उनकी दिशा

चाँद सा शीतल, सूरज सा अचल
यह तू है , है तेरा ऐसा करम
सूरज का क्रोध, चाँद की चंचलता
मैं दर्पण तेरा, एक सा सब पर सब अलग

सूरज की लौ से दमके चंदा
पर सूरज के साथ नही है चलता
खेले हरपाल आँख मिचोली
सूरज तपे तोह करे ठिठोली

सब कह कर भी रहा सब अनकहा
रास्तें हैं कई पर नहीं कोई  दिशा
तेरी दिशा में चलूँ तोह तेरी उम्मीद हूँ
डर है मगर की कहीं अस्तित्व ही न खो दूं.

चल ऐ राही ज़िन्दगी की राह पर,

गलियों में , पगडंडियों पर,

पर्वतों को फ़तेह कर, समुन्द्रों को पार कर

विषम ही क्या हुआ वो जो रख न दे तुझे बदल कर